February 4, 2023
afsar vyangya ki prasangikta likhiye

अफसर व्यंग्य की प्रसंगिकता क्या है?

नमस्कार दोस्तो, यदि आप हिंदी विषय के इतिहास में थोड़ी भी रुचि रखते हैं, या फिर आप हिंदी विषय के इतिहास को पढ़ते हैं, तो आपने इसके अंतर्गत अफसर व्यंग्य के बारे में जरूर पढ़ा होगा। आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको बताने वाले हैं, कि अफसर व्यंग्य की प्रसंगिकता क्या है, यदि आपको इस विषय के बारे में कोई जानकारी नहीं है, तथा इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको इसके बारे में संपूर्ण जानकारी देने वाले हैं।

हम आपको इस पोस्ट के अंतर्गत हम आपको बताने वाले हैं कि अफसर व्यंग्य की प्रसंगिकता क्या है, इसके अलावा हम आपको इस विषय से जुड़ी हर एक जानकारी इस पोस्ट में देने वाले हैं।

अफसर व्यंग्य की प्रसंगिकता क्या है? | afsar vyangya ki prasangikta par prakash daliye

दोस्तों अक्सर कई परीक्षाओं के अंतर्गत यह सवाल पूछ लिया जाता है, कि अफसर व्यंग्य की प्रसंगिकता क्या है, और बहुत से लोगों को इस सवाल के बारे में जानकारी नहीं होती है। यदि आपको भी जानकारी नहीं है तो आपकी जानकारी के लिए मैं बता दूं कि अफसर व्यंग्य की प्रसंगिकता निम्न प्रकार से है:-

दोस्तो यह अफसर व्यंग्य श्री शरद जोशी जी के द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जिसके अंतर्गत हमें देखने को मिलता है कि वह अपने दफ्तर के एक मुख्य अधिकारी जिसको अक्सर कहा जाता है, उनके गुणों के बारे में बात करते हुए कहते हैं, कि उनके द्वारा अक्सर अपने व्यंग्य बाण छोड़े जाते हैं। श्री शरद जोशी जी का मानना है, कि प्रशासनिक ढांचे में ढलकर एक अफसर तैयार होता है।

शरद जोशी जी के अनुसार अफसर आता रहता है, जाता रहता है, लेकिन अफसर कभी भी मरता नहीं है, इसको समझाने के लिए उन्होंने हमारे शरीर का भी उदाहरण दिया है, जिस तरह से हमारी मृत्यु हो जाती है, लेकिन हमारी आत्मा कभी नहीं मरती है, उसी तरह से अफसर की खुशियां लगातार बदलती रहती है, लेकिन अफसर की अफसरी सिर्फ वही रहती है।

शरद जी के द्वारा ही यहां पर अफसर को चालबाज इंसान व समय के साथ चलने वाले एप्प दिले कछुए की संज्ञा दी है, जो समय के साथ अपना रुख किया चलता रहता है, जो एक प्रकार का सीधा सादा जीवन नहीं जीता है, बल्कि जीवन को दिल करता है। शरद जी का कहना है कि एक दफ्तर के अंतर्गत अफसर से लेकर चपरासी तक सभी घूसखोर होते हैं अफसर का बाजार जमा हुआ है, वह दो पैसों की मटकी भी ठोक बेजा कर लेता है, यानी कि वह छोटी सी छोटी चीज को भी चेक करके लेता है।

तो यहां पर श्री शरद जोशी जी के द्वारा एक अक्षर के ऊपर जिन व्यंग्य बाणों को व्यक्त किया गया है, उन के माध्यम से उन्होंने समाज के अंतर्गत अफसर की एक छवि को बताने का प्रयास किया है।

वैसे मेरे विचारों के अनुसार सभी अफसर इस तरह के नहीं होते हैं, हमें इस जीवन में हर एक प्रकार के इंसान का अनुभव होता है, जिसमें हमे कुछ अफसर ऐसी भी देखने को मिलते हैं, जिन पर शरद जोशी जी की यह वाणी पूरी तरह से फिट बैठती है, जबकि हमें कुछ बहुत अच्छे स्वभाव के अफसर भी देखने को मिलते हैं।

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निष्कर्ष

तो इस पोस्ट के अंतर्गत हमने आपको बताया कि अफसर व्यंग्य की प्रसंगिकता कीजिए, इसके अलावा इस विषय से जुड़ी अन्य जानकारी अभी हमने आपके साथ शेयर की है। हमें उम्मीद है कि आपको यह जानकारी पसंद आई है, फिर तो आपको इस पोस्ट के माध्यम से कुछ नया जानने को मिला है।

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